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अधूरा

शाख से टूटे पत्ते आ कर मेरी गोद में गिरे थे,
पीले, चुरमुरे, रंगमिटे से 
आज उनमे से एक पत्ता किताब के पन्नो के बीच मिल गया,
भूरा, चुरमुरा, अधूरा सा,
ठीक वैसा ही ठहरा जैसे वो पल ठहरा है जब बारिष से पहले 
ज़ोरों कि हवा में उलझ गयी थी मेरी लटें,
और सुलझाने के बहाने तुमने गालों को छुआ था मेरे,
हाँ, वो पल, वैसा ही है ,
मटमैला, चुरमुरा और अधूरा..

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सलाहों का बंदरबाट

एक तो काले रंग में दाग वैसे ही नज़र नहीं आते और उसपर न्याय की मूर्ती को अँधा और बना दिया गया, की बस जनाब सालो साल खेलते रहिये आँख मिचोली और देखते रहिये बंदरबांट सलाहगारो और मददगारो के बीच, फिर अगर उस सलाह से कुछ मदद मिल जाए तो खुदा का शुक्र मनाइये और आपको बचाने वाले से जीवन भर की बची कुची बचत पर चपत लगवा कर बाकी वक़्त बिता लीजिये। निष्पक्ष और न्यायप्रिय ठेकेदार सदैव आपकी सेवा में तत्पर रहेंगे चाहे आप कुछ भी कर लें, वे अपने साथ पक्षपात कभी नहीं होने देंगे और आपके पूर्वानुमान, अधकचरे ज्ञान को तारीखों की धीमी आंच पर तपा देंगे की आप पक्ष और विपक्ष का ही सही अनुमान लगाते रह जायेंगे। बस इसलिए वक़ालत नही कर पाए! 

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