Friday, 28 July 2017

अरेंजड भसूड़ी भाग २

अगर ना पढ़ा वो तो पिछला भाग यहाँ पढ़ सकते हैं!

अगर लिंक खोल कर लम्बा पोस्ट पढ़ते में बूढ़े होने का डर है तो आगे बढ़िए, नमस्ते, दिन अच्छा हो..

http://www.himmilicious.in/2017/07/blog-post.html?m=1

#अरेंजड भाग २

नहा धो के सुंदर बच्चा बन गए, माँ बचपन में कहती थी जो बच्चे जल्दी नहा लेते हैं उनको भगवान जी पास करवा देते हैं।
बताओ, बचपन से बनाया जा रहा है और हम बन रहे हैं..

नाश्ते का टाइम तो निकल चुका था सोचा सीधा लंच ही करते हैं अब , बुआ आइ है कुछ तो अच्छा बनेगा..

नीचे गए ही क्यों? नहीं जाना चाहिए था.. किचन में जा के देखा तो बुआ जी ख़ुद ही पकाने में लगी हुई थी। हो गया नाश.. फुफ़्फ़ड पता नहीं कैसे ज़िंदा है इतनी मिर्च खा कर.. हमने पिताजी की तरफ़ देखा और आँखों ही आँखों में समझ गए वो, बोले "ग़ुड्डो कॉर्नफलेक्स खा ले"
"अरे नहीं नहीं मैं आलू पूरी बना रही हूँ" तपाक बुआ बोली..
(बुआ की तो पूरी में भी मिर्च होती है!!)
मैंने कहा " हाँ बुआ आप बनाओ, मा पापा खाएँगे ना.. मैं ओईली फ़ूड अवोईड कर रही हूँ.."
कह के मैं बच ली.. "अरे रुक" पूरी तलते तलते बुआ ने अपनी और खींचा और मोबाइल में उनके ससुराल की किसी शादी की तस्वीरें दिखाने लगी "ये देख, कैसा है.. मनोरंजन....?" एक वानरों के हुजूम में कोट पैंट पहन कर खड़ा था, बाक़ी सब भी कोट पैंट में ही थे! अब अगर मैं पूछती की कौनसा वाला है तो लगता की इंट्रेस्ट ले रही हूँ और सारे एक जैसे ही लग रहे थे 'वानर'
(देखो, सच यह है की मैं हूँ सिंगल अगर किसी को डेट कर रही होती तो शायद चिढ़ जाती लेकिन यहाँ मज़ा आ रहा था, वैल्यू बढ़ रही थी.. फ़ीमेल ईगो फ़ीड मिल रही थी.. और सामने से लड़का दिखाया जा रहा था और पिताजी? पिताजी चुप!!..)
यहाँ मैं आपको बताना चाहूँगी की हमारा परिवार थोड़ा न वैसा सा है.. वो होते हैं न.. जो मर्ज़ी खाओ, जो मर्ज़ी पहनो, मस्त रहो लेकिन घर में!
लड़कों से दोस्ती? ना जी ना!
छोटे कपड़े? अजी कहाँ!
सहेलियों के साथ नाइट आउट? विचार त्याग दीजिए साहब..
हम एक बार तस्वीर देख कर आँखों का चटकारा ले दूसरी ओर पिताजी को देखें..

देखो, बाप और बेटी का रिश्ता बड़ा अजीब होता है.. जहाँ बाप और बेटा हद से हद दोस्त बन जाते हैं, वहीं एक पिता बेटी के लिए सबकुछ होता है और पति उसको ऐसा चाहिए जो उस 'सबकुछ' की छवि का एक अप्डेटेड वर्ज़न हो।
तभी अगर कोई लड़की ये प्यार-मुहब्बत कोका-कोला करती है तो लड़कों को समझ जाना चाहिए वो हर क़दम पर यह बैलेन्स बैठा रही है की इस वाली आदत को पापा के सामने कैसे रेप्रेज़ेंट करेंगे क्योंकि पापा तो ऐसा करते नहीं..

ख़ैर, तुम नहीं समझोगे ये फ़ीमेल कैल्क्युलेशन है..

और यहाँ ऐसी कोई बात नहीं थी, सबसे बड़ी राहत की साँस इस बात से थी की अगर माल ख़राब निकल तो दोषारोपण मुझपर नहीं होगा!

इंडिया दोषारोपण पे चलता है भई!

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