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Showing posts from 2017

फैसला..

ये फैसला तेरा है अब, खुद को पूरा का या मुझे अधूरा कर जा, मुझे काफ़िर बना दे या मेरा खुदा बन जा तू जब भी मिलेगा सजदा तेरे लबों का करेंगे या थाम मुझे और सुकून देदे, या जीने की ही वजह बन जा, यूँ न खफा हो, है फासले तेरे मेरे दरम्यान, मुझसे वफ़ा नहीं तो मुझे बेवफ़ा कर जा.. खुद को पूरा कर या मुझे अधूरा कर जा.. अब न ज़िद होगी, न इंतज़ार तेरे आने का, ना होगा मकसद किसी बहाने का, तू किसी और को चाह कर भी ना पा सका तू मेरा ना बन, मुझे मेरा कर जा.. खुद को पूरा कर या मुझे अधूरा कर जा.. बस चंद लम्हों में हट गए तेरे कदम हाथ थाम कर बैठा था बेवजह शायद अब थाम ही ले हाथों को, या मुझे बेवज़ह कर जा, खुदा बन मेरा या मुझे काफ़िर कर जा.. है फैसला तेरा, मुझे अधूरा या पूरा कर जा.. तेरी मुहोब्बत, तेरी बगावत, तेरी रंजिश, तेरी मंज़िल ही सही मुझे हमसफ़र ना सही, मेरा सफ़र बन जा, वापस आ और समेट बाहों में बिखरने से पहले या सैलाब आने दे और मुझे पत्थर कर जा.. अधूरा, या पूरा, पर फैसला कर जा..

The winters..

''This weather, chai, one shawl and you in the balcony.. '' Wish you were here, I'd have shared some sips of chai Leaning in the balcony, Giggling over your jokes Sometimes, resting my head On your shoulders Or hiding in your warm shawl Wish you were here I'd have tasted your lips For long I'm craving for kiss And that beautiful song Wish you were here, Holding me in your arms Leading the way of romancing souls.. I'd have followed your steps In this weather, chai, one shawl and you in the balcony..

करवट

महज़ इस बात पे लड़े थे हम की करवट बदल कर पहले थामे कौन पलकों पर सूखी हुई नमी को न मैंने दिखाया ना वो पलट कर कह सका के छोडो जाने दो महज़ इस बात पे लड़े थे हम की करवट बदल कर पहले थामे कौन.. चुप चाप रसोई में जा कर सुबह की चाय बना दी बिना कुछ बोले तौलिया वहीँ रखा रोज़ की तरह इससे पहले वो कुछ बोले मैंने मौक़ा ना दिया बेतरतीब पड़ी फाइलों को समेट, कमीज का टूटा बटन टांक दिया फिर भी उदास चेहरे पर ये उम्मीद थी तिरछी आँखों से इंतज़ार था उसके हाथों का कमर पर के मनाने के लिए थोड़ी जद्दोजहद होगी तो मान जाउंगी अपनी बात ऊपर रख कर सब कुछ मनवाउंगी चिट भी मेरी और पट भी मेरी का रिवाज़ तो उस दिन से था सालों पहले चाय की प्याली सरकाते हुए और सबकी नज़रे बचाते हुए धीमे से पुछा था मुझसे "थोडा गुस्से वाला हूँ.. चलेगा?" मैंने सर झुका कर भर दी थी हामी और कहा " अगर थोड़ा नखरा मेरा भी हो तो चलेगा?" और अब महज़ इस बात पे लड़ बैठे हम, करवट बदल कर पहले थामेगा कौन.. ..करवट बदल कर पहले हमें थमेगा कौन.. Edit 10/2/2021 A friend tried his version on podcast. :) https://hubhopper.com/episode/karw

The man and the wife

I chose to be blind and good with my ears. I have stopped being an espionage for his deeds and I shifted him from my first priority. and I have firmly prepared my head to catch my heart the next time it breaks. That's how I chose to be happy and made efforts towards it.. That's how he became a loyal man and I, a wife.

नवम्बर में छुट्टी की दोपहर

उनके बालों में चांदी की तारें थी, लंबी सी नाक पर एक हल्का सा तिल, निचला होंठ मानो, खुद ही बहार झांकता हो, और बड़ी बड़ी भूरी आँखे। चहरे पर कुछ दाग से थे, उनको एक टक लगा कर देखूं तो अटपटा से जाते थे, चहरे का रंग कुछ ज्यादा ही सांवला था और उनके सीने से मुझे कुछ ज्यादा ही प्यार था.. अंदर घुस के जैसे ही सोती, ठण्ड मानो गायब सी हो जाती, और मैं ऐसे उनकी बाहों में फिट हो जाती जैसे उन्ही के लिए बनी हूँ। बिस्तर पर लेटे नहीं की भारी साँसे और खर्राटे शुरू, मुझे बाहों में यूँ कस लेते हैं की जरा सी तेज़ सांस लूँ तो नींद टूट जाए, सोच कर,मैं हिलती भी न थी.. मतलब सोचो, इंसान सोएगा कैसे गर इतनी ज़ोर खर्राटे कोई ले तो? फिर ज़रा सी करवट ली और भींच लिया और माथा, आँखे, नाक, होंठ, गाल चूम के फिर सो गए! कभी कभी लगता है जैसे मैं कोई टेडी बेयर हूँ, और वो कोई पापा की लाड़ली प्रिंसेस, छोड़ते ही नहीं.. एक काँधे पर गाल लगाए और सीने पर हाथ रखे 20 मिनट हो गए थे बाबा राम देव के "आक्वार्ड आसान" की दम घोंटू मुद्रा में लेटे हुए, कान गर्म हो चुका था और उनका कन्धा भीग चुका था, बड़ी मुश्किल से मैंने अपनी टांग निक

Ever loved someone like this?

Ever loved someone so deeply that he/she meant the world to you. Your morning started and night ended with him. All you wanted to do is to take care of the person and dedicated yourself completely for his/her happiness and to fulfill each small and big demands.. ..also for those things that you couldn't afford yet worked so hard and smart to be resourceful and fulfill that desire.. Ever loved someone so madly that you could destroy the world apart on a single drop of tears in his/her eyes? You loved to sit, sleep, cuddle, laugh, demand, with him? You wanted to grow old loving him/her and submit your life in loving him/her. The only peace you got was into his/her arms.. his/her existence in your life made you worth living.. Ever loved someone so truly that you could protect and made him/her the happiest person in the world, give everything he/she ever wanted?? Well, let the person be 'you' yourself and get whatever the hell you want in life.. ;)

..because you left me in the pain. (Part 1)

"You love to make mistakes, don't you?" Said he, looking deep into her eyes while she stood quiet with pink eyes and opened lips. "What did I do, now?" He opened the buttons of her shirt and she stood still "mistake, yet another mistake". He stripped her body naked and she hid her bossom with her long brown hair " so, would you punish me now?" "Yes, I will." Swallowing her saliva, she asked again, "...but I want to know, what is my mistake?" He could feel the heaviness in her respiration, he could feel the struggle of her lips to breathe, he could feel the hesitation that she had to show her body, he could feel the pain in her soul and he could feel the anger inside her. "Why are you so angry?" "Because I hate you." "...but why? Why do you hate me?" "Don't you know?" A tear rolled down her cheek, tear of anger and pain, of complaints, asking millions of questions s

देखो न.. (2015)

देखो न, कुछ टूट सा गया है.. मेरा ख्याल भी,  तुम्हारा दिन भर तंग करने का तरीका भी  और वो गुलदस्ता  जो चांदनी चौक में कुल्फी खाते वक़्त एक नज़र में भा गया था,  और तुमने कनखियों से देख लिया था मुझे निहारते हुए,  फिर बिना बोले कुछ, खरीद लिया,  और मैंने भी कुछ ना बोला, रख लिया.. देखो ना, कुछ टूट गया है.. ठण्ड में अपने जैकेट में मेरे हाथ घुस लेने का तुम्हारा अंदाज़,  ठंडी नाक देख कर झट सीने में घुसा लेने की आदत,  फूक मार मार कर चाय पिलाने वाली बात  और जनपथ की गलियों में पीठ पर लगाते हुए स्वेटर नापने की आदत.. देखो ना, यह चूड़ी भी चटक गई है, अक्षरधाम के पुल पर गाडी रोक कर जो तुमने छल्ली और अमरुद खिलाए थे,  छोटी सी लड़की जो चूड़ियां लेके आई थी,  मोल भाव करके, तुमने मुझे पहनाई थी  और फिर खुद ही दोनों हाथ पकड़ कर छनकाई थी प्यार करते वक़्त, दोनों कलाइयों को भींचा कभी,  दोनों हथेलियों को पकड़ कर गालों पर चूमा कभी, देखो ना, कुछ टूट गया है, तुम भी, मैं भी, तुम्हारा और मेरा साथ भी..

कुत्ती तलब

यह चाह बड़ी कुत्ती है, वही चाहिए जिससे मुहोब्बत है फिर क्या मालूम कितनी हुस्न परियाँ बदन से हो के निकल जाए, कितने राजकुमार पलके पॉँव के नीचे बिछा दे, रूह को तो कमबख्त एक ही ने छुआ था, और एक ही के सीने में छुप के सुकून मिला था, उसके बाद तो लोग महज़ दिल बहलाने और ज़रूरतें मिटाने का सामान बन गए। उसमे कुछ पसंद नही था लेकिन जो था वह थोडा थोडा जहाँ से जैसा, जितना मिल जाए समेटने की कोशिश कर उसके खालीपन को पूरा करने की फ़क़त कोशिश होती है, फिर भी तलब पूरी नहीं होती.. दरबदर, ढ़ूढ़ते हुए आदत पड़ जाती है तलब के साथ जीने की और फिर, देर सवेर वो रूह-छुआ मिल भी जाए, क्या फ़ायदा, अब तो उस बिन जीना आ गया.. कुत्ती सी चाह है यह, तलब

तुझे बहकना होगा

उसकी गर्दन से चिपकी लट को छुड़ाया हमने, पेशानी से टपकती खारी बूँद को चुराया हमने, फिर मुझे सोच में सिमटना होगा, वो ख्वाब है, उसमे बहकना होगा.. मैं रेशम सी सिलवटें कुछ उसपर बना दूँ, उसके कंगन में उलझे धागे हटा दूँ, गर्म साँसों से अपनी जो उनको भिगाया हमने, सिरहन से उनके रोम को उभरना होगा, वो ख्वाब है, उनमे बहकना होगा.. दाँतों से कतर देती है उँगलियाँ अपनी, होंठो से खींच लेती है परतें कितनी, बिखरा के बालों को, फिर यूँ ही बाँध लेती हैं कई बार खुद को बालों सा बिखराया हमने, पेशानी से टपकती बूँद को चुराया हमने, फिर तुझेे सोच में सिमटना होगा, तू ख़्वाब बन, मुझे बहकना होगा... - हिमाद्रि

हक़ीक़त हूँ मैं

कुछ अच्छा लिखो तो हम पढ़ें भी, यूँ ही कलम टटोलते रहते हो जैसे मेरी पीठ पर उंगलियो से लिख रहे हो। कुछ अच्छा कहो तो हम सुने भी, यूँ ही बुदबुदाते रहते हो जैसे सीने से लगा कर कानों में कुछ कह रहे हो। ऐसे थोड़े ही होता है, कुछ अच्छा सा सुना दो, हर वक़्त क्या एक ही ग़ज़ल गुनगुनाते हो की मैं हंस दूँ। हटो, छोडो मुझे, ज़रा मुझसे बहार आओ हकीकत हूँ मैं, तुम्हारा ख़याल नहीं...

गोया, इश्क़ सीखा कर गया

ना उसने कभी अपनी गलती मानी, ना मैंने कभी उसे माफ़ किया. गोया, ऐसा इश्क़ सिखा कर गया कि ना फिर किसी से कर पाई, ना किसी को करीब आने दिया। झूठ क्या बोलना, और किससे छिपाना? जैसी मेरी ज़िन्दगी रही वैसी हर किसी की है, हर कोई इश्क़ करता है, मरता है, जीता है, टूट जाता है और फिर इश्क़ कर लेता है.. खैर, उसको समझ नहीं आएगा, समझ आता तो जाता ही क्यों? देख कर यह अच्छा लगता है कि मैंने उसे शायर बना दिया.. हा हा हा.. ना जाने कितनी लड़कियाँ अब उसकी शायरी पर हाय करती हैं और मैं देख कर मुस्कुरा देती हूँ, "वजूद नहीं है इसका कोई, खोखली है, तुम्हारी तरह" चीख़ती, खाली बंध कमरे में दौड़ती हुई, छटपटाती, खीज से भरी झुँझुलाती याद.. कभी 2 मिनट में आती थी, फिर 2 घंटे, फ़ॉर 24 - 24 कर के 3-4 दिन में एक भूला भटका ख़्याल आ जाता है.. जैसे दिवाली आ रही है, उसके ऑफिस से आए सारे चॉकलेट और फ्रूटी के डब्बे मुझे टरका कर दिवाली मना लेता था.. या यूँ ही फ़ोन कर के कभी किसी ग़ज़ल का मतलब समझा देता था, बिना पूछे की मुझे सुनना है भी की नहीं.. वो बोलता रहता, मैं सो जाती, कब फ़ोन काट जाता.. पतानहीं बस हाथ में रहता सुब

साथ सा..

तुम लिखते रहो,मैं मिटाती रहूंगी शब्द सा, याद सा, अनकहा कुछ तुम कहते रहो, मैं छुपाती रहूंगी वो कुछ मेरे जज़्बात सा मैं तो वही थी, पिघल जाती जो तेरी तर्जनी की छुअन से ओस सा, भाप सा, भीगी बरसात सा.. तुम हो, न हो, हो भी, नही भी हैं कुछ मेरे साथ, तुम्हारे साथ सा, पास सा..

हम नहीं हैं..

हम नहीं हैं अब भी मुस्कुराते हो? उन अजीब शक्लों पर, अल्हड़ आवाज़ों पर जो यूँ ही बनाती थी मैं तुम्हें हँसाने को रोज़ सुबह उठाने को.. हम नहीं हैं, अब भी मुस्कुराते हो? किचन से भुने पनीर के गायब होने पर जो यूँ चुरा लेती थी और खाने को तुम्हे चिढ़ाने को.. हम नहीं हैं, अब भी चिल्लाते हो? हर छोटी बात पर, दिन या रात पर जो मुझे रुला देते थे डराने को, फिर चुप कराने को.. देखती हूँ तुमको, तुम अब भी वही हो भर गई है मेरी कमी, है नज़र तुम्हारी ज़माने पर जो चिढा देती है, रोने-हँसाने को तुम्हे रूसा कर मनाने को..

If you leave, you will leave me with nothing.

"If you leave, you'll leave me with nothing" he said and kissed her to stop. She ran fingers in his hair in the mansuetude of care,  the way she used to cuddle him and make him sleep on her breasts, said nothing. There's an unexplained crave and desire you feel for someone,when you think of the person all you can imagine that one moment which binds you... maybe that soul locking kiss. When lips are locked with no air between all you could taste the cold saliva and the soft tongue. "I can't stop thinking, your kisses.. I so miss kissing you" he said grabbing her face between his flat palms. She said nothing.. "Speak something" he pressed his palms hard and her lips glanced out like pouting baby. "You never said you love me and wish to spend your life with me.." She said, softly, looking down at her feet. "I'm a man" he lifted her face and made her look into her eyes. "I can't express the way you w

बेतुका

ज़िन्दगी क्या है? एक सवाल बेतुका सा.. बीता साल था एक ख़्याल बेतुका सा.. खुद ही चाहा, ना मिला, रूठ गए.. फिर मना लिया ख़ुद को दे बहाना बेतुका सा.. जिंदगी क्या है? सवाल बेतुका सा.. कोशिश नाक़ाम करता है वह दूर जा कर पास आने की, खोया हमें, पाया तो क्या फिर यह मलाल क्या है बेतुका सा, ज़िन्दगी क्या है? सवाल बेतुका सा.. खोखली गली में थी अंधेरे आवाज़ गुमशुदा चीख़ता ज़हन भी था था यार वो ग़मज़दा था अलग पर एक साथ वो रास्ता बेतुका.. ज़िन्दगी है क्या?

बोझ

कभी यादों को बोझ होते देखा है? उन पत्तियों सी झुक जाती हैं जिनमे ओस भरी हो, सुबह सवेरे गिर जाती हैं जैसे रतजगी रोई हो, पर सुबह भी कभी कोई रोता है? अब हर कोई ना तुझसा है ना मुझसा, माँ कमरे में आ जाए तो झूठे मुँह आँख में ओस भर कर सोता है.. (माँ को पता ना चले, कई बार सिसकियाँ दबा कर भरी आँखों से सोने का नाटक किया है..)

Excel vs Sandwich

Bedroom success is another target a man has to meet other than the sales. I used to give him targets. "Three before office","on your study table" my favorite one was saying "Not tonight!" and giving him a perfect invitation with the female fluids secreting from my intentions to get overpowered in the bed tonight. "Not tonight", I said.  He smiled and pretended "what happen?"  I said," work assignment, gotta work, shall sleep late" "Okay" and he walked out of th bedroom to hall, flipping some channels and watching his old crush movie Fast and Furious 1. I started working. It genuinly hurts your eyes and lower back when you work on screen at night on the bed. I should sit on study table instead but then I'm the slave of comfort seeking a life beyond chair and desk. Been an hour and more he isn't there. I find it hard to explain this feeling. Why do I just want to have him in front of my eyes