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Showing posts from November 20, 2016

कुल्लड़ की चाय..

चंद चुस्कियाँ चाय की हलकी, सर्द शाम में यूँ ही बेवजह बैठे कहीं छोड़ सारे काम मैं आ जाती झूठ बोल कर जब भी तुम बुलाते थे एक कुल्लड़ चाय पर हँसते हंसाते थे.. तुम हो नहीं, आदत दिला गए एक कुल्लड़ चाय की हुड़क सिखा गए हैं चंद चुस्कियाँ चाय की हलकी, सर्द शाम मे वक़्त यूँ ही निकल जाता है चाय में, और काम में..