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कुल्लड़ की चाय..

चंद चुस्कियाँ चाय की
हलकी, सर्द शाम में
यूँ ही बेवजह बैठे कहीं
छोड़ सारे काम मैं
आ जाती झूठ बोल कर
जब भी तुम बुलाते थे
एक कुल्लड़ चाय पर
हँसते हंसाते थे..
तुम हो नहीं, आदत दिला गए
एक कुल्लड़ चाय की हुड़क सिखा गए
हैं चंद चुस्कियाँ चाय की
हलकी, सर्द शाम मे
वक़्त यूँ ही निकल जाता है
चाय में, और काम में..

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एक तो काले रंग में दाग वैसे ही नज़र नहीं आते और उसपर न्याय की मूर्ती को अँधा और बना दिया गया, की बस जनाब सालो साल खेलते रहिये आँख मिचोली और देखते रहिये बंदरबांट सलाहगारो और मददगारो के बीच, फिर अगर उस सलाह से कुछ मदद मिल जाए तो खुदा का शुक्र मनाइये और आपको बचाने वाले से जीवन भर की बची कुची बचत पर चपत लगवा कर बाकी वक़्त बिता लीजिये। निष्पक्ष और न्यायप्रिय ठेकेदार सदैव आपकी सेवा में तत्पर रहेंगे चाहे आप कुछ भी कर लें, वे अपने साथ पक्षपात कभी नहीं होने देंगे और आपके पूर्वानुमान, अधकचरे ज्ञान को तारीखों की धीमी आंच पर तपा देंगे की आप पक्ष और विपक्ष का ही सही अनुमान लगाते रह जायेंगे। बस इसलिए वक़ालत नही कर पाए! 

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