Friday, 25 November 2016

कुल्लड़ की चाय..

चंद चुस्कियाँ चाय की
हलकी, सर्द शाम में
यूँ ही बेवजह बैठे कहीं
छोड़ सारे काम मैं
आ जाती झूठ बोल कर
जब भी तुम बुलाते थे
एक कुल्लड़ चाय पर
हँसते हंसाते थे..
तुम हो नहीं, आदत दिला गए
एक कुल्लड़ चाय की हुड़क सिखा गए
हैं चंद चुस्कियाँ चाय की
हलकी, सर्द शाम मे
वक़्त यूँ ही निकल जाता है
चाय में, और काम में..

Friday, 18 November 2016

#नोटबंदी में आश्की : अंतिम भाग..


#नोटबंदी में आश्की : अंतिम भाग..
तो बात कुछ ऐसी हुई के लाईन में उसने मुझे अपने आगे बड़े रौब से खड़ा कर लिया और मेरे दिल में कबूतर फिर से फड़फड़ाने लगे..
मेरा हाल 13 साल की उस लड़की की तरह था जो अपनी क्लास में जिस लड़के को सबसे ज्यादा पसंद करती थी उसी से बात नहीं करती थी, अजीब सी हिचकिचाहट..
दिल में एक हूक यह थी की हाय मेरे ज़ालिम कबूतर तू ही कुछ बात कर..
मैंने बड़ी मेहनत करी थी यहाँ तक पहुंचने के लिए और मेरा इंतज़ार भी कम न था!
हालांकि मुझे दढ़ियल लौंडे पसंद नहीं आते लेकिन इसमें कुछ बात थी, और मुझे फ़वाद ख़ान तो कतई पसंद नहीं है.. शायद इसकी वो भारी आवाज़!
देखो! ऐसे वक़्त में एक लड़की के दिल और दिमाग में कई सारी जलेबियाँ तल रही होती हैं.. एक तो सामाजिक परिधियों का डर दूसरा इतनी सारी जनता!
यह ठीक वैसा ही संकोच था जैसा किसी भी लड़के को होता है जब उसे कोई लड़की पसंद आती है, वह सिर्फ उसे जानना चाहता है, वो कौन है.. लेकिन लड़कों की सोशल रेपुटेशन तो ऐसी है मानो उसने आगे बढ़ कर "hi!" क्या बोला लड़की उसको मौकापरस्त रेपिस्ट समझ लेती है..
मैं मौकापरस्त रेपिस्ट नहीं लगना चाहती थी!
हाँ वो मुझे पसंद आया..
तो जनाब, बात वहीं की वहीं आ गई..
टप्पा मार के नाला तो कूद लिया आगे कहाँ जाए..
अब तक मैंने ही बात शुरू की, आगे बढ़ी, और इतने सिग्नल दिए, मंदबुद्धि बालक तो नहीं कुछ समझ ही नहीं रहा!
मेरी अंतरआत्मा वाली बेस्ट फ्रेंड ने फिर झपड़िया दिया मुझे "देखो बाबू, ई लौंडा इंट्रस्टीड ना हौ, चौपसी नै कराओ और चुप खड़ी रहो"
तो हमने सोच लिया जब तक अब यह नहीं कुछ बोलेगा, हम नहीं बोलेंगे..
स्त्री स्वाभिमान और वर्चस्व का पर्दा मुझपर हावी होने लगा..
तभी पीछे से धक्का लगा और वो थोड़ा सट सा गया..
हाय!!! मेरा स्त्री स्वाभिमान मेरे दांतो के बीच होंठ बन कर दब गया और मेरे गालों पर गड्ढ़े बन गए..
उसने हलके से कहा.. "सॉरी"
मैंने भी मुस्कुरा कर कहा दिया "इट्स ओके"
मेरा पहल न करने का डिसीजन मेरे गालों के गड्ढो में डूबता सा जा रहा था और पेट की तितलियाँ गले तक आ कर गेम ऑफ़ थ्रोन के ड्रैगन बन चुकी थी!
सब्र टूटा और मैं तपाक बोल पड़ी.. "आप एग्ज़क्टली कहाँ रहते हैं"
"214, सेकंड फ्लोर"
"ओह!.. लेकिन आप कभी दिखे नहीं.. व्हाट डू यू डू?"
"गुड़गांव के आईटी फर्म में हूँ.. और तुम?"
हाय!! आप से तुम.. कितना सुन्दर तुम था यह..
मैं स्कॉलर हूँ.. रिसर्च कर रही हूँ! मैंने कहा..
अच्छा! किस कंपनी में? उसने पूछा..
मैं ऐसे प्रश्न से थोड़ा झेंप गई लेकिन फिर खुद को समझाते हुए मैंने कहा.." पीएचडी रिसर्च स्कॉलर"
ओह! पढ़ाकू टाइप्स हो!! नाइस नाइस..
तो करती क्या हो?
मैं समझ चुकी थी अबोध बालक को इस बारे में कुछ ज्ञात नहीं है! कोई बात नहीं..
"कुछ नहीं.. वेल्ली हूँ" हाहा.. कह कर मैंने बात टाल दी..
"हाहाहा.. काश मैं भी वेल्ला होता.."
मैंने सिर्फ मुस्कुरा दिया..
होता है, होता है!! बेहद मामूली बात है.. अब अगर मैं किसी नैनोबायोटेक्नोलॉजी इंजीनियर से बात करूँगी तो वो भी मुझे वैसाखिनन्दन समझेगा..
"तुम कहाँ रहती हो?"
"आपने वो चौहान हलवाई देखा है?"
"हाँ"
"बस उसकी अगली गली में"
मेरे दिल में अभी भी यह सवाल कौंध रहा था, कही यह शादीशुदा तो नहीं!!
"तो आप अकेले रहते हैं यहाँ पर?"
लीजये, छोड़ दिया मैंने तीर! आर या पार.. 10 सेकंड के अंदर मैंने उसके "हाँ" के लिए मन्नतें मांग ली, 33 करोड़ देवी देवता को याद कर लिया और एक टक लगाए उसकी आँखों में जवाब देखती रही..
हाँ.. फ़िलहाल!
ये फ़िलहाल क्या होता है? मतलब क्या बनता है यह हाँ के साथ फ़िलहाल जोड़ने का.. मतलब क्या बाल विवाह हुआ था और अब घर ढूढ़ लिए शहर में तो बहुरिया का गौना करवा के लाओगे? मन ही मन में खीज गई!
फ़िलहाल? मतलब आपकी वाइफ अभी हैं नहीं यहाँ..?
मैंने झुंझुलाहट में सीधी तलवार खींच दी!
"हाहा.. नहीं, मेरी शादी नहीं हुई है अब तक.."
देखो और समझो ये वाली फीलिंग..
'गवर्नमेंट एग्जाम क्लियर हो गया'
मेरे चेहरे पर मुस्कराहट आ गई और आवाज़ में वोही चहक वापस..
"ओह! ओके.. फिर, भाई या पेरेंट्स?"
अब मुझे फील हुआ मैंने ज्यादा पर्सनल क्वेश्चन पूछ लिए,थोड़ा इस ज़ुबान को लगाम देदेनी चाहिए..
"मेरा पार्टनर" वो बोला..
अरे तेरी! इसको भी कहीं स्टार्टअप का भूत तो नहीं?
कहीं यह उन लौंडों की तरह तो नहीं जो फेसबुक पर लिख के रखते हैं "works at I'm my own boss" या "Ceo and MD at my own business"
आज कल औंतरप्रीनियोर का मतलब होता है आपके भेजे में एक धाँसू बिज़नस या मोबाइल एप्प का आईडिया है लेकिन उसको भुनाने के लिए अभी तक कोई बकरा नहीं फसा है!!
"Okayyy" कह कर मैंने भी "हाँ मैं समझ गई " वाली टोन दे दी..
"so what do you do in your free time? Hobby? Gaming? Gym?" उसने बात बढ़ाई..
लड़के ने इंटरेस्ट ले लिया भाई! अब भाव खाने का टाइम आ चुका है.. आ जाओ अपने लड़की अवतार में।
देखो और समझो..
हम लड़कियां बड़ी स्मार्ट होती हैं, देखने में चाहे कैसी भी हो.. जैसे ही पता चलता है कि पतंग हवा में पहुँच चुकी है बस डोर खींच ली..
और इस बात में कोई दो राय नहीं की इस नखरे में मज़ा बहुत आता है..
"Yeah.. many!!" मैंने आँखे ततेरते हुए कहा.. और मन में सोचने लगी "पके हुए घीये के बीज.. तुझे किस षष्टिकोन से मैं जिम जाने वाली महिला लगती हूँ!
खैर.. इन्ही छोटी छोटी बातों, मोबाइल टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक मनी,केजरीवाल और मोदी के कारनामे.. ममता दीदी और अखिलेश यादव के ड्रामे.. सोनम गुप्ता की बेवफाई और काले धन के ताने बाने में मेरा नंबर आ चुका था.. मैंने हज़ार का नोट चेंज करवाया तो काउंटर पे बैठा बैंक वाला भी मेरी शकल देखने लगा..
देखो! मेरी सच्ची मुहोब्बत, धैर्य, लालसा, और कर्मठ होने का प्रतीक है यह 1000 का नोट!!
और मेरे बाद उसने भी करवा लिया..
मैंने उसका वेट किया.. (मुझे प्यार हो गया है शायद.)
वो मुस्कुराता हुआ सामने से चला आ रहा था..और मेरे सर के चारो तरफ हाथो में तीर लिए लंगोट पहने छोटे बच्चे उड़ रहे थे...
"My partner is coming in couple of days, if you wish we can go for morning walks.."
उसने सामने खड़े होकर कहा.. और मैं गर्दन उठाए उसे मुस्कुरा कर देख रही थी..
"that means, you're gonna wake me up daily in the morning?"
इसको कहते हैं ट्रम्प कार्ड खेलना.. अब या तो वो मेरी अलार्म क्लॉक बनने के लिए फ़ोन नंबर मांगेगा या मैं खुद ही उसको दे दूँगी..
"haha.. yeah? why not ma'am!.. should I come down your place and ring your bell daily 5am?"
(अबे बौरा गया है क्या, पापा बाँध के बैठा देंगे और कुत्ता छोड़ देंगे तेरे ऊपर)
"haha.. nope.. a phone call would do!!" मैंने डायरेक्ट लाइन देते हुए कहा..
हम साथ साथ चल पड़े.. क्योंकि घर एक ही जगह था और अब तो "पड़ोसी प्रेम" निभाना था!
हालांकि इस दौरान वो काफी बार अपने पार्टनर की बात कर चुका था तो इस बात ने मेरे अंदर क्यूरियोसिटी बढ़ा दी..
..एंड क्यूरियोसिटी किल्स दी कैट! मैंने क्यों पुछा..
"so.. what does your partner do?"
"oh.. he's a business man.. actually we are flying to Ohio next month, he got a job there.." उसने ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा..
घर पहुँचने में अभी वक़्त था और मैंने जानबूझ कर अपने कदम धीमे किए हुए थे..अब तक एक एक पल कितना सुहाना लग रहा था.. न ट्रैफिक की चिल पोँ.. न भिखारियों के छूने से चिढ.. कुछ सुनाई नहीं से रहा था बस दिल में हार्ट शेप बबल ऐसे फुट रहे थे मानो फेसबुक मैसेंजर पर किसी ने लव स्टीकर भेज दिया हो.. पट पट..पट..पट..
और उसकी इस बात ने जैसे मेरे हार्ट शेप गुब्बारे में नुकीली पेन्सिल चुभा दी हो!
what? you're leaving India? मैंने चिढ कर कहा.. your friend is getting job there.. you have your life here, I guess" मैंने बड़ा प्रैक्टिकल और मैच्योर बनते हुए कहा..
(काहे ही मैच्योरिटी बे! कैसे जा सकता है ये.. मतलब अब क्या मुझे सिंगल ही रहना पड़ेगा! कुछ भी कर के इसको रोको भाई...)
देखो! प्यार तो प्यार होता है.. 4 साल का होंय 4 दिन का.. और इसके लिए तो इतनी मेहनतभी की है, अपने संकुचित कन्या वाले अवतार से कूद कर, सामाजिक परिधियों को लांघ कर, और खिसियाई हुई नोटबंदी की लाइन को धोखा दे कर साथ चल रही हूँ..
मैं क्रन्तिकारी भावनाओं से अभिभूत थी.."प्रेम क्रांतिकारी.. बहुत ही क्रांतिकारी"
और इसी क्रांतिकारी हथकंडो को अपनाते हुए मैंने नंबर एक्सचेंज कर लिया था.. यह मेरे प्रेम की फ़तेह थी!! मैं तारिक़ फ़तेह महसूस कर रही थी.. और दिल में इसको रोकने का षडयंत्र बुन रही थी..
मेरा दिमाग चाचा चौधरी हो चला था क्योंकि मुझे यह 6 फुटिया साबू चाहिए था..
घर पास आने वाला था..वो बोला" yes, actually.. we don't have a life in India"
देखो! प्यार एक तरफ है और राष्ट्रवाद एक तरफ! मैं देख के लिए लाइन में खड़ी हो सकती हूँ.. इतना तो मैं जियो सिम के लिए नहीं खड़ी हुई.. लेकिन इंडिया को कुछ बोला तो अभी शब्दभेदी बाण चालू होंगे और मैं नमस्ते लन्दन की अक्षय कुमार बन जाऊँगी..
"what do you mean?" मैं वहीँ मेडिकल स्टोर के सामने रुक गई, एक आइब्रो उठा कर आवाज़ में थोड़ी सख्ती लाते हुए पूछा.. (गन लोडिड थी, की अगर यह एंटी नेशनल निकला तो मैं अपने प्यार का गला घोंट दूँगी और साले को अभी कच्चा धारी नाग बना कर शपथ दिलवाऊंगी)
"actually.. we are planning to get married in February in Ohio, society doesn't accept us here"
wait! what! मैंने जो सुना वो मुझे समझ नहीं आया और मेरी शक्ल पके हुए पिलपिले खरबूजे सी बन गई (भाई अंतर्जातीय विवाह कर रहा क्या और खाप पंचायत पीछे आ रही?)
प्यार में चोट लग चुकी थी, पल्ले कुछ न पढ़ा और सिर्फ "getting married" समझ आया..
"We are gay and it's not legal in India" उसने आगे कहा..
यह वो वाली फीलिंग थी 'जनरल कोटे के लास्ट चांस में भी प्रिलिमिनरी क्लियर नहीं हुआ, बाकी चीज़ों के लिए उम्र निकल चुकी है, सिर्फ BA pass डिग्री हाथ में है और कोई प्रोफेशनल एक्सपीरियंस नहीं है'
oh!! (और क्या कहती मैं.. इस ओह में आह थी.. आह.. दिल टूटने की आवाज़ नहीं होती)
"that's great.. in that case you must fly.. I'm happy for you.. yeah.. we live in the socity of hypocrites " मैंने अपनी भाव भंगिमा सुधार कर मीठे स्वर में कहा..
I have many gay friends, and they're happily settled in delhi only.. give a second thought.. our society isn't that bad..
यह मेरी रेस्पोंसिब्लिटी बन गई थी की मैं उसको कम्फ़र्टेबल फील करवाऊँ, कहीं वो यह न सोचें कि मैं उसे जज कर रही हूँ..
उसने मुस्कुरा दिया.. अब यह मेडिकल स्टोर सीमा थी उसके एक तरफ वो और कुछ दूर मैं रहती थी..
अलविदा कहने का टाइम था.. "चलो see you again then.." मैंने कहा..
"तुम और नोट एक्सचेंज करवाने जाओगी? साथ चलेंगे.. I'll call?" उसने पूछा
"nope! I am left with nothing now.."दो तरफ़ा बात कहते हुए मैं मुस्कुरा कर आगे चल दी..
आज सुबह 5 बजे की मिस्ड कॉल थी किसी unknown number से..
मेरा KLPD हो चुका था, "खड़ी लाइन पर धोखा.." मैं किसी की सौतन नहीं बनना चाहती थी..
और एक तरफ़ा प्यार बड़ा दर्द देता है, मैं शाहरुख़ नहीं जो डायलॉग मार कर निकल जाऊँ..
बाय द वे.. वैसाखिनन्दन संस्कृत में गधे को कहते हैं..

Wednesday, 16 November 2016

नोटबंदी में आश्की भाग 2

#नोटबंदी में आश्की भाग 2
तो आप लोगों की दुआ कुछ ऐसी रंग लाई की तीन दिन बाद वो दिख गया..
लेकिन आज कतार में वो इतनी आगे खड़ा था कि मुड़ कर देखे तो भी नज़र ना आऊँ, हाँ.. मैं लेट हो गई, करीब एक-डेढ़ घंटा लगा लीजिए..
सुबह सब्ज़ी को लेकर पिताजी के नखरों से चिक चिक करती माँ,कढ़ी में हींग का तड़का लगाने-ना लगाने की संसदीय बैठक और कर्नाटक के मिनिस्टर रेड्डी अपनी बेटी की 500 करोड़ की शादी में मैं फस गई थी..
सच कहूं तो मैंने हिम्मत नहीं हारी थी और आखरी ट्राय मारने मैं आज फिर चली गई नोटबंदी की कतार में.. ( कल रात तो लंबू का सपना भी देख डाला: वैसा वाला नही..)
बिना नहाए, एक आँख में फैला हुआ काजल, पाजामा डाले, चप्पल पहन और हाथ में एक कलम पकड़ कर यूँ ही चल दी..
दिल्लगी का आलम तो देखिए, मात्र 1000 रूपए बदलवाने चली, जो की आसानी से जल बोर्ड के दफ्तर में जमा हो जाते.. लेकिन दिल के कबूतर की गुटरगूँ तो आपने भी सुनी होगी..
पहुंची तो इतनी लंबी कतार देख कर मानो अपनी किस्मत को ही सौतन मानने का मन किया.. अंदर वीर ज़ारा के गाने बजने लगे की इन 20 लोगो की झाड़ियों को लांघ कर कैसे उस गन्ने तक पहुँचूँ.. मीठा, रसीला गन्ना आज हाफ पैंट में था और मेरी नज़र उसकी टांगों की तरफ..
मेरी हालात उस आदमी के जैसी हो रही थी जिसने लड़की को इम्प्रेस करने के चक्कर में 4 बोतलें बियर की चढ़ा ली हो और रेस्टोरेंट में यूनिसेक्स बाथरूम हो और आगे 5 लड़कियाँ खड़ी हो..
बस मैं कुछ ऐसे ही मचल रही थी और अपने हाव भाव छुपाने की कोशिश भी कर रही थी..
1 घंटा 12 मिनट.. मैं खड़ी रही और वो खुबानी के बीज का कड़वा बादाम एक बार भी पीछे नहीं मुड़ा..
जब मुझे यह पक्का हो गया ये हाफ पैंट पीछे मुड़ेगा नहीं.. मुझे ही कुछ तिकड़म लगाना पड़ेगा और फ़ोन कॉल सबसे मस्त होता है..
फ़ोन उठा कर फ़र्ज़ी कॉल लगाते हुए कहा "हाँ मम्मी.. लाइन में खड़ी हूँ.. हेल्लो.. हाँ मम्मी.. "
आगे खड़े लड़के से कहा, भईया आपके पीछे खड़ी एक मिनट में आई कह कर आगे चली गई.. की उसकी नज़र में तो आऊँ..
फिर कान में खाली फ़ोन लगाए आगे निकल गई.. कनखियों से उसको देखा, और आगे जा कर बाल खोल लिए.. मन ही मन सोचने लगी.. हाय!! नहा लेना चाहिए था.... चुड़ैल तो नही लग रही.. फिर कोने में जा कर फ्रंट कैमरा ऑन किया और आँखों के नीचे का फैला हुआ काजल साफ़ किया..
बालो तो सेट किया और मटकती हुई बिना उसकी तरफ देखे वापस आने लगी की उसकी नज़र मुझ पर पड़ जाए..
लेकिन कहाँ जनाब! 2000 के नए नॉट की तरह मैं भी "पैसे हैं लेकिन पैसे नहीं हैं"वाली हालात में थी..
यहाँ थोड़ी बेशरमी की जरूरत थी और मैंने ही उसके पास जा कर बोल दिया "oh hi!! You again!!"
हाय.. वो मुस्कराहट.. वो बोला "hello, you got your change?"
"Oh no.. not yet.. I'm standing way behind you.. guess, would be taking more than 2 hours after you.."
ये मारा मैंने टिपिकल लौंडियों वाला इमोशनल कार्ड और वैसा वाला मुँह.. बस गन्दी वाली झंड होती अगर वो "ओके" बोल कर बात ख़त्म कर देता..
"Oh.. okay" वो बोला.. बस फुस..
मन ही मन सोचा लो अब क्या करोगी.. कंटीन्यू दी कन्वर्सेशन बेबी!!
"Yeah! And I'm badly getting late for an interview.. it's scheduled for 2 PM.. guess I have to miss it!!"
अजी काहे का इंटरव्यू..! जो आया दिमाग में फिट कर दिया बस..
"Oh! That's bad.. you wanna come ahead me? If it helpa?"
देखो!! वैसे तो मैं बहुत शांत और संभली हुई कन्या हूँ लेकिन उस वक़्त मानो मेरी मन की मुराद बुधवार वाले भगवान ने सुन ली.. मेरा दिल उस कुत्ते की तरह ख़ुशी से लोट रहा था जिसका मालिक सारे दिन भर के बाद ऑफिस से घर आया हो..
"That would be a great help! But umm.. " मैंने एक्सेंट झाड़ते हुए बोला और वो समझ गया मैं लोगो की बात कर रही हूँ!
किसी को बीच में घुसा लो तो जनता खाप पंचायत सी भड़कती है जैसे मैं दूसरी जाती की लड़की हूँ और दूजे जाती के लड़के से प्यार कर बैठी!
"It's okay.. just come!" बस.. उसका यह कहना और मेरा छोटे से बच्चे की तरह बीच में घुस जाना..
और शुरू हो गया हल्ला!! मैंने होंठ दबा लिए की बेज्जती करवा कर पीछे जाना पड़ेगा और उसके सामने भी इम्प्रैशन की मट्टी पलीत होगी.. तभी वो भारी सी आवाज में बोला "क्या दिक्कत है? एक घर के हैं फैमिली है!!"
उसका यह कहना था और बस मैं तो सर से पांव तक ब्याह करने के लिए तैयार हो गई थी..
मुझे उसमे सारे अच्छे गुण दिखने लगे.. और "फॅमिली है" हाय.. शादी ऐसे होगी और बच्चे ऐसे होंगे और हनीमून यहाँ और लॉन्ग ड्राइव वहां..
मतलब मेरे गाल फूल कर भटूरा बन गए थे और दिल ऐसे बच्चे की तरह उछल रहा था "मिल गया.. मिल गया..मिल गया.. ये!!!"
देखो!!वैसे तो मैं बेहद शर्मीली कन्या हूँ लेकिन कभी कभी बेशर्म होना पड़ता था!!
एक मेरी अंतर आत्मा उस बेस्ट फ्रेंड की तरह है जो हमेशा नेगेटिव ही कहेगी उस लड़के के लिए जिसको भी मैं डेट करुँगी और ज़िन्दगी भर आपको "डिज़रविंग मैन" के लिए सिंगल रखेगी और साथ में यह डायलॉग जरूर चिपकायेगी "देख मैं तेरी बेस्ट फ्रेंड हूँ और तुझे मुझसे अच्छा कोई नहीं जानता.. दैट गाए इस नॉट गुड फ़ॉर यू.. यू डिज़र्व बेटर" (लड़कियों वाली बात है, वो समझ जाएँगी)
तो मेरी उसी अंतर आत्मा ने थप्पड़ मारा और सोचने पर मजबूर किया "अबे बहन बनाने की तो नहीं सोच रहा.. फ़ेमिली बोल रहा है"
खैर..चिक चिक करते लोग चुप हो चुके थे "अब सिर्फ वो और मैं और ये नोटबंदी की कतार"
हम 2 घंटे लाइन में खड़े रहे.. जनाब का नाम कबीर है..
देखो! मैं बड़ी शांत किस्म की कन्या हूँ, लेकिन कभी कभी शैतानी करनी पड़ती है..
अब 6 फुट लंबा इंसान पीछे खड़ा हो तो बातों में कुछ अजब की लचक आ जाती है..
दो घंटों में मैंने बहुत कुछ किया है, जल्द ही बताती हूँ पहले रात के खाने वाली चिक चिक से ज़रा निपट लूँ..
तब तक आप मुझे बताइये, इन जनाब को पटाने के नुस्खे..

नोटबंदी में आशक़ी Part 1

नोटबंदी ने उन लौंडो को भी दिन भर लाइन में खड़ा कर दिया है जो सिर्फ रात को जिम में बॉडी पंप करके सीधा नाईट क्लब जाते थे..
मुझे पता नहीं था मेरी कॉलोनी में इतने गबरू भी हैं जो अब नोटबंदी के स्प्रे से कोने कोने में छुपे कॉकरोचों की तरह बहार निकल रहे हैं..
परसो स्टेट बैंक की लाइन में लगी थी, दो आदमी छोड़ कर एक 6 फुट का दढ़ियल खड़ा था। कभी देखा नहीं था उसको आते जाते, या दूध की डेरी पर, केमिस्ट में, किराने की दूकान पर..
दिल में कबूतर से फड़फड़ा गए उसको देख कर और दूसरी बार पलट कर आँखों में आँखे डाल दी मैंने..
लंबा तो था ही, सीधा एंगल बन रहा था नैनमटक्का करने के लिए..
अब दो विकल्प थे मेरे पास, या तो उसको अपने आगे बुला लूँ या अपने पीछे खड़ी दोनों अम्माओं को आगे बढ़ा कर खुद उसके आगे लग जाऊँ..
उसको आगे करती तो जनता मुझपर ऐसा पथराव करती मानो गाँव में किसी औरत को चुड़ैल घोषित कर दिया हो जमींदार के छोरो ने..
और दिल में बड़े सारे सवाल थे भाई साहब!!
इतना "हॉट" लड़का है, सिंगल तो कतई न होगा..
उम्र में छोटा हुआ तो माँ वाली फीलिंग तुरंत से पहले आ जायेगी मेरे अंदर..
बात शुरू कैसे करूँ.. आस पास का है क्या.. दिखा क्यों नहीं अब तक..
कहाँ इन घसियारों की फ़ौज में एक गन्ना उग गया..
और मैं डेस्परेट नहीं लगना चाहती थी.. पैसा जरूरी है..
इसी कश्मकश में मैं एक बार फिर पीछे मुड़ कर उसको देखने लगी.. 'कुछ तो बोल'
फिर मैंने दिल मसोस कर सोचा चलो जाने दो.. मैरीड भी हो सकता है.. बहुत बार कटा है ये "बाद में शादीशुदा निकला" केस में मेरा..
बाकी जनता कुछ गालियाँ दे रही थी, कुछ बुद्धिजीवी बनने की कोशिश कर रही थी, कुछ मोबाइल पे केंडी कृश खेल रही थी और मेरा दिल यहाँ छोले भटूरे हुआ जा रहा था..
कोई "पंच लाइन" भी नहीं सूझ रही थी, सच कह रही हूँ दिमाग की फैक्ट्री में one liners बनने बन्द से हो गए, कोई आइडिया नहीं आ रहा की कैसे एक बार पीछे मुड़ जॉन और बात शुरू हो जाए..
हाय, वो सिल्की सिल्की से बालों में उसका हाथ फेरना.. फिर मोबाइल निकाल कर टाइम चेक करना.. फिर टीशर्ट खेंच कर सीधा करना.. चप्पल में भी कितना क्यूट लग रहा था..
हिम्मत कर के मैं फिर पीछे मुड़ी और उसको देखा.. कम्बख़त मोबाइल में लगा हुआ था..
करीब 40 मिनट मेरे दिल के जुझारू मुर्गे यूँही भिड़ते रहे और मैं उस ख़यालों में चिकन निहारी बनाती रही..
जब रहा नहीं गया, तो पीछे वाली अम्मा को बोला, "अम्मा आपके आगे खड़ी हूँ, एक मिनट में आई" और फ़ोन करने का बहाना करके एक चक्कर काट आई..
वापस आते वक्त उसके साथ खड़ी हुई.. और एक स्माइल दे दी..
फिर जा के अपनी जगह खड़ी हो गई..
दबंग तो हम बचपन से हैं और अम्मा दोनों बहुओ की बुराई में लगी हैं.. बस फिर पीछे मुड़ कर तुक्के में इतना पूछ लिया "You live somewhere near..or something? I guess I have seen you somewhere.."
एक मुस्कराहट के साथ उसने भारी आवाज़ में अपना ब्लॉक नंबर बताया.. "Yes, just nearby, next to medical store"और बस.. अब तो मैं शाम तक खड़ी हो सकती थी..
फिर मैंने और कुछ नहीं पूछा.. दो दिन हो गए, अभी तक दोबारा दिखा नहीं है.. अब की मिला तो बस..
~ नोटबंदी में आशक़ी..

Thursday, 30 June 2016

I failed, I quit, I failed quitting too.

Set backs and failures are the major motivations in life.Some are so painful that don't kill maybe that's why they make me strong, immune and a reason to fight with myself.
Sometimes, even if, I have the focused goals, other things fall apart.
It's hard to hold all the balls together in the arms and run, somehow, anyhow they fall. I collect and they fall again. For some mediocre, like I am, not born with silver spoon, travelled in crowded groping buses to college and every morning, finishing up and then going to work, coming back and taking care of parents being only child has never been easy.Petty things like, Losing friends due to denial of every single invitation of a party or not meeting the expectation of parents had been a part of the daily life.
I wonder, why did I not choose to get married at the age of early 20s and get 'settled' like most of my female friends did and I can see them having beautiful carefree life ahead.
Thousands of dreams every year, I could see dying every end of the year and I kept smiling with a hope of dreaming again, something new. It doesn't need words to explain how much it hurts when you really wanted to do something and could not do it despite of being capable and having all resources, just because you are morally bound to obey the orders and the meet the expectations of others.
Which is not bad, we all deal with our shits, I deal with my fair share too. There is nobody to blame, I could have been a rebel and go against the world to achieve something bigger that what little I have collected so far, but neither did I have the support to be a rebel nor did the circumstances show signs.
I am not among those 1 out of 10 girls who has gotten all special privilege to be a rock star and then became a rock star, my parents raised me well within their strength, or maybe I never demanded anything, could never, wanted to, of course, but never did.
I am not sad, nor I am satisfied and made my peace with circumstances, never, I don't compromise.
The major challenge of walking alone without guidance you get late. You reach, because you didn't quit walking but when you reach there, you see a crowd whining at you.
Sometimes, I wish I had an elder brother who could do magic and everything would have been a fairytale. He could beat the shit out of those leeches, with whom I dealt alone because it's impossible to tell your parents the story of 'how I beat the man who touched me in the bus', after all, no matter how liberal ideology you follow, you're rooted to be a woman, which of course you are, and this is not an excuse to be more demanding in the society.
I wish, genital difference would have never affected my life but the naked reality, it has affected me in all worst possible way, yet I have never taken privilege of being woman, say it be a seat in metro but I don't feel sorry about it.
The most innocent woman on this earth I have seen so far is my mother. My little home, three of us, her plants and pets mean world to her. She is a superwoman with a magic wand, without her, well, we cannot survive even a day. Trust me, Internet ideas doesn't help when it comes to thank a mother.
When I fail, I see her and the only motivation screams within me is "Do for her" because she has done every possible thing beyond her strength for be and I feel like I have done nothing for her. Sometimes, I doubt myself, ' would I be able to do anything for her?'
Set backs pinch you a lot, when you see all your efforts and time wasted and you are to restart from zero. It is never that I never failed and did not think of quitting, I tried quitting and failed in that too!! LOL
The more I hear the problems of people the more I feel blessed that almighty has blessed me with a will power to deal with my problems, and that's all I pray. I know I am going to be very late to achieve what I have desired and the only life line I have is the keep walking with patience. I do not expect a wizard in my life or a guardian angel who would stand by me to cushion me whenever I fall, especially without filthy desires. Kalam sahab once said,"Don't take rest after your first victory because if you fail in second, more lips are waiting to say that your first victory was just luck." that's why I chose to fail multiple times.
Writing is first person is never easy, people judge you,but people with judge you any-which-way possible.
people consider me heartless and true that, I have become heartless in past years because my heart wants me to settle down with least and quit struggling, which is not me. 
To conclude my ranting, If today I am dealing with another set back in my life and all my efforts go waste, I will not quit (like I said, I failed in quitting too) not because I have people to answer who are holding expectations with me but for the reason I wish to have purpose in my life to hold on to.
I am among those crores of average women who are not only thanklessly living for their families being a daughter but also doing a bit for the society.
Like I said to one of my dearest friends today,'' woman, you can give birth to a child from your vagina and you think you are weak?'' Although, she laughed, yet I meant it. Deal with it, get over it, live it, it's life, it's a woman and it will bleed and have PMS, why to be sorry about it? why to be sorry for being woman?
I am a single woman, I live a hardcore single life without a man, I am a daughter, I never quit studying, I work, I earn money, I have spent so far of my life to meet my parents expectations and failed many times, I win, I achieve, and I keep walking with a high head. So should you, do not be adamant and never get demotivated by the set backs of your life or the people you fail to keep with yourself, rather take it as an opportunity to get another gps track to reach your destination. Let go and Let God.

Like they Say, better late than never!






Monday, 13 June 2016

And I lost the counts.. (Chapter 2)


and on the other hand, Moni, a woman not at all travelled, unknown to most of the colours of life, opposite to Sameer, not at all an "I don't know metro city girl"
Common thing between them? Assamese tongue.
Moni likes Sam for being full of experiences; however she has too many people around her, full of experiences, knowledge, amazing brains and something that we call "SapioSexuals". The thing with Sam, he doesn't know Moni, at all, what she's, how she works, or what she works, where she works, who she is, what is her life about, what is her past, present and nor does Sameer cares about future.
He thinks, she is predictable and she lets him think that way "Whatever makes you happy".
Sometimes, it becomes necessary to release the love you have inside because it has been stuck in you for so long, like I say, "when you stop loving somebody, you start loving everybody.....", ah, well, let's not complicate it.
Keep it simple like this generation wants "meaningless"
Moni liked being driven, she let him do that, she is driving everything around her life Controls and manages everything in her life and she just wants to sink into an anonymous, unknown planet where people don't come after her for a photograph or just another corporate gig.
"Moni, where is your hand?" asked Sameer.
Moni played the guitar strings "leave the guitar and take your left hand inside your tee-shirt, touch your breast"
"No"
"Yes"
"No"
"Do it, take your hand there"
There was something in the command, playing with Moni's kinky desires of submission she did as directed.
Sameer could hear the breaks in her breathe "and take right to your thighs" he continued.
"Stop" she whispered, "Stop directing me"
"you like it" said Sameer.."Pinch your bosom softly, feel your skin, take your hands between your thighs"
"Sammy, Stop doing it" she could barely speak it.
"Can you turn your belly down and squeeze your bums with both hands?"
"Yes"
"Do it"
She turned her face down, stretched her hands to her butts and squeezed it "Mmm... she moaned"
"are you high?" he asked.
Moni did not say anything.
"Can you feel it in there, Moni?"
"Yes.." she said.
"What are you wearing?"
"I'm in my pajamas" She said.
"And..?"
"..and my tee shirt, and my lingerie, and.."
"What is the colour?"
"Black"
"Are you wet and high?"
Moni kept quiet. "Tell me" Sameer asked dominatingly.
"Ah.. Yes.." She said in all her desires. 
"Good, get up now"
"what? Why?"
"Stay high, stand up"
"No.. Why" she said unwillingly.
"Because I'm parked outside your home, wear heels and come out" Sameer said in a plain voice. 
"What!!!" it was a bummer. Impossible. He was at his home. When did he drive here? "Are you kidding me?" happy and surprised she said.
"I don't have time, wear heels come down in 5 minutes"
"Sam I'm in pyjamas, messed up, not ready to go out, sweaty, give me some time to correct myself"
"you're wet, you're high, I want my woman in her skin, no artificial scents" said Sameer, "Come the way you're."
This is what a woman wants in her man, rawness. One who can accept the way she is right at the moment.
Moni never experienced such craziness in her life. She tied her hair wore her heels, took her bag, and looked herself in the mirror.
She had a smile on her face; her eyes were widened and shining. She picked up her scent but stopped. She kept it down and didn’t wear the perfume.
Sameer was there. She saw him at a stretch. She smiled and walked towards the car. Sameer was sitting in the car, in his shorts and tee shirt, wearing chappals and messy hair.
"Are you crazy, what are you doing here, don't you have office, and it’s unplanned?"
Asked Moni, with a chuckle in her voice.
"Did you bath?" He asked ignoring all her questions.
"Yes, I did, in morning, but...”
"You should not have, I will wash you" he spoke before she could complete her sentence.
He started the car and asked "are you high?"
"No, I'm not. How can i be, I'm distracted!"
"You’re. I can smell you"
Moni kept mum.
"Suli kele bandhile(why did you tie your hair), who asked?" Sameer opened her clutches while driving. 
"Sam I'm messed up, I never go out like this"
"I know miss corporate, why are you wearing a nail print?"
"Areh! Ki hol tumak aji? (What has happened to you today) crazy holniki? (Gone crazy) said Moni, for Sameer unexpected behaviour.
"Aren't you liking it?" a question unanswerable he shot. He literally drove her today.
She couldn't understand why is she loving his commands when she is of a dominating nature, maybe it's a new flavour, maybe she is experimental. 
She’s just getting different shades of her painted by Sameer.
Sameer opened the curls of her hair and spread it on her shoulders. While driving he started touching her ears and her cheeks. He increased the volume of music "touch yourself" he said. "What, no! We are on the road" said Moni.
"If you want me, I can touch you" and Moni came near him touching his chest "you smell bitter, cigarettes" she continued.
"No. Touch yourself"
"People will see"
"Nobody will, it's my car and I want you high"
"You have gone insane Sam" and she laughed.
"Can you be loud?" Sameer didn’t have smile on his face, he was enjoying the play, he had that calm expression of not getting driven "Can you say my name loud"
"Yes, Sameer"
louder.. Sameeer..
Louder.. Sameeeerr.. 
More, Louder.. "Sameeeerr" and he pulled her hair softly "now touch yourself"
Moni gasped as he held her hair, he moved her hands on her thighs over the pyjamas. "Put your hand inside" 
she slid her hand in her pyjama and started rubbing her love Valley over her underpants.
She was quiet, music was loud, and Sameer was driving calmly not looking at her.
"Pull the back down and move the seats" she did, made space for her legs and stretched her legs. 
"What are you doing with your hands in your pyjamas Mon"
"I'm touching myself" she said in a slow voice.
"Tell me Mon, can you feel your love juice?"
"Why are you doing this to me?"
"I haven't touched you yet" She said, with the same calmness on his face.
Moni started touching Sameer's neck while touching herself "Don't touch me" said Sameer.
"I want to" and then the car stopped on red light and the spell broke.
The songs kept changing from one track to another track and they reached Sameer’s apartment  


To be continued..

And I lost the counts.. (Chapter 1)

"Do you know, that you're funny without knowing it?" I could never understand this statement made my Sameer.
"What do you mean?" I asked and he laughed louder,
Come on! You can do better than this; you're dealing with a person with 137 IQ."
"Yeah? Right! And here comes the wave of self praising voices to give His Highness a mental boner."
"See! Koisilu Nohoi (Told you so) you're funny without knowing it- speaking about boner, I have one right now."
"What!! umm.. are you.. ha-ha okay!" 

It was a bump on the road, unexpected, since Sameer made the rule over our first call, ‘No double meaning cheesy talks between us'

"You're breaking the rule"
"I want to break your hymen"

That was blunt. Left me word blank for some good seconds. Trying to control the situation, I said mocking "aww! next birth, I'm not a virgin, right!"
"Because you're afraid of exploring your body, you're a woman of 30 years, haha! and.."

"Okay.. Stop!
What is so new in it? I have seen men older than me and virgin" 
"Being virgin and not craving is acceptable, tasted, yet not craving? Torturing yourself"
"You know nothing Mr. Narcissistic"
"What are you doing right now?"
Sameer asked.
"Talking to you, head is down the bed and legs on the wall, hands on guitar strings and talking to you. Why?"
"Touch yourself"
"What! No!"
"You're in the best position where I can eat you"
"Stop talking sex with me, you're breaking rules"
"You have an Assamese skin, pale, peach-ish, and bronze tanning and you smell like a woman, your hair has that smell"
"When did you smell me, Sam?"
I asked surprisingly.

"I have a strong nose and eyes too -What is your size? 36? C? No! B?"
With widened pupil, I kept quiet for a minute, "So when are you leaving Delhi?" - I tried changing the topic.
"I will, just don't fall for me; I'm not going to stay here" he said bluntly.

"I will never fall for you, you're not my kind of a man" I said taking the control of the situation, and convincing myself, smacking my wits and reminding not to fall for a migrant bird.

"Good. I like the clarity you have, woman. If that makes you happy" He said. I could sense his cunning smile.


The manipulative art of turning the situation for you and presenting it as if this is what you want and you're being pleased, we are Dealing with Sameer, 39 years brownish man with big scanning eyes and heavy lashes to die for, working the IT sector And not at all an IT guy. More of a nature seeker, mountain hiker, backpacker and all those jazzy hash tags people use to define themselves. 

Straight from tea gardens to concrete, craving to get released into plants again, carefree alone man with his dogs, full of experiences of travelling, food, people - their behaviour, and of course, women. 

Plays those petty tricks of a charmer, being a gentleman, and comforting just like those patient wolf aiming the lamb in the most natural state following the instinct.

To be precise,a person who knows the basic instincts of human nature and simply following it with no false pretensions and hassle free lifestyle.



Chapter 2

Friday, 10 June 2016

हर शख़्स मेरी ज़िन्दगी बनना चाहता है

बैठ सामने मैं हँस देती हूँ ज़िन्दगी के,
यूँ हर शख़्स मेरी ज़िन्दगी बनना चाहता है,
हँसने से नहीं पड़ी लकीरें मेरे चहरे पर,
वो चादरों की सिलवट बनना चाहता है,
मुगालतों से भरी कुछ ख़्वाहिशें सबकी,
मैं जानती हूँ वो ख्वाहिशों में क्या चाहता है,
तू भी सही, तू भी सही और तू भी सही,
वो सब ग़लत कर, ठीक होना चाहता है,
मैं जानती हूँ उन ख्वाहिशों को,
हर शख़्स मेरी ज़िन्दगी बनना चाहता है..

Tuesday, 5 April 2016

Make sure, you know "Something" to be "You"

When you fall for someone, you let the person in, inside the walls you have built.
Inch by inch with good, bad and ugly experiences. Some, at work. Some, in family. Some, of society and some, yourself.

And then the person- he takes something from you, little pieces of you, over time, tiny bits that you don't realize something is getting shallow.
One day, you're 'you' and then one day you become something that you weren't - something that the person wanted you to be.
You lie yourself, you jeopardize your career, agree to do whatonearthsofuckingever the person wants you to do.
And even then, being not you, you're ready to be everything.
You lose yourself for a long time and then you feel you're finally the one who you want to be, well, you can't.
you fall for someone again. You do something again you don't want to, and then again this new "someone" takes a piece of you and you let it..
Make sure that never happens again.
Make sure you're not gone, piece by piece.
Make sure, you stay "you".
People come, change you, and then they go because you're changed.
It's your, very own life, let none ruin it.


I know, you must be thinking it is confusing and vague. But no, oftentimes you do not realize what happened, everything was "okay", what went wrong and whose fault was it that your relationship ended.

Changing your wiring is hard, you have to change in and out. Your nature might be polite, calm and submitting just because :-

1. You don't want to take up a fight and you avoid it.
2. You give priorities to your partner's feelings.
3. And various stupid reasons. Well yes, those petty excuses. 

For the time being, analyze, what are those petty excuses that you make to ignore the fact that bit by bit someone is taking away pieces from you.

And in my next post, I will tell you, how to stay in relationship and not lose yourself. 


#Psychology #emotionalAbuse #Relationship #Submission