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Showing posts from July 20, 2014

कुछ यूँ भी

सिर्फ एक तेरे सीने पर सर रख रात बिताने के लिए, मुहोब्बत भी की, बगावत भी की, कुछ दर्द सहा, इबादत भी की, फिर मर भी गए वादों की तरह.. ..के जनाज़े के बहाने जो तू छू ले ..तो फिर जी उठेंगे हम यादों की तरह.. :)