Tuesday, 26 August 2014

Love Jehaad

#LoveJehaad!??!*@#+*/ अब ये कौनसा नया टॉपिक है??

देखो फतवे के लिए हिन्दू क्या शब्द लगाते हैं पता नहीं..
अब तक की ज़िन्दगी को निचोड़ दूं तो पता चला, अफ़्शा,अदनान,अनस, अब्दुल, आसिफ, नाज़, लुबना, शफ्क़त, यासीन, क़मर, वासिफ़, मुदस्सिर, नज़र, सहर, ताज़िल..और बग्लादेशी अफ़सर.. इन नामों में सिमट जाएगा.. बचपन में कोई राखी बंधवाता था अब कोई मंदिर जाता है.. एक बार की मुलाक़ात में कोई बहन बन गयी किसी कोई अनकही ज़रुरत बन गई.. एक से सिर्फ दुआ सलाम का रिश्ता है और एक सिर्फ 'साहित्य-भाई' बना हुआ है.. दो ने उस वक़्त साथ दिया, जब शायद, फासलों की वजह और दायरा कम करने के चक्कर में ज़िन्दगी का फलसफा धुंधला पड़ने लग गया..
असली काफ़िर और दकियानूसी तो हिन्दू मिले मुझे, इन्होने कम से कम ये तो ना पूछा, कुमारी लगाती हो नाम के आगे?? ये नाम में "S" क्या है? श्रीवास्तव, शर्मा, शांडिल्य,सिंह, सिरोही....!!! ना मैंने पूछा की निम्न कोटि के मुस्लिम हो या उच्च कोटि के?

#Reminder (clarify dillema)- एक का समझ नहीं आया, मुस्लिम है, आसामी है, क्या आसामी मुस्लिम भी होते हैं या आसामी , आसामी होते हैं? आसामी चिंकी होते हैं? मिजोरम में नेपाली जैसे होते हैं? मतलब असम/अरुणाचल/ मणिपुर/ और जो भी है सब = नेपाली?? वो जैसे सारे मद्रासी ही होते हैं और noida & gaziabad को छोड़ कर सारा बिहार ही है और दिल्ली यानी पंजाबी ही होगा, और गुडगाँव टच किया नहीं की बस धक् धक् शुरू कौनसा जाट और गूजर में से कौन गन्दी नज़र से देखेगा और कौन मेट्रो से बाहर निकलते ही छुरा घुसाने दौड़ता चला आएगा!!!!
बहुत ज़रूरी है बॉस, फेसबुक स्टेटस से ही लोग भड़क सकते हैं क्या पता कौनसी धारा लग जाए..
"अज्ञानता ही परमानन्द है" का विवाद और अपवाद बनमानूस कानून (अब लम्बे हाथ, अंधे, सिरफिरे, मनमानी करने वाले, खाकी बाल वाले छोटे बनमानुस और काले सफ़ेद चितकबरे से बड़े गुर्रिलों के लिए क्या उपमा लगेगी?? नहीं पता! हिंदी और अंग्रेजी दोनों की "गरामर/Grammer" गोल है )
खैर, अज्ञानता ही परमानन्द है की आड़ में लंगूर बने दोस्ती यारी का केला तो खा गए लेकिन पता भी नहीं चलने दिया कब मैं "बेगम हिम्मीकश गोलूबानो नूरेभौकाली खां बीबी' बन गई "जेहादी शर्मा" से.. (#य़ा_राम #हे_अल्लाह) ऊप्स सॉरी कान पकड़ के सेंसिटिव इशू है, वैसे ही बेबाकी और हाज़िरजवाबी (एक्चुअली जबान-जोरी) की वजह से लोग फुके पड़े हैं..
इत्थु.. सी ज़बान नहीं संभाल पाती रिश्ते, नौकरी, कंपनी, क्या ख़ाक चलाऊँगी!!..

उर्दू भाषा के रुझान में हे भगवान् मैंने क्या अनर्थ कर दिया, शनि की वक्र दृष्टि कहीं "मीर से फैज़" को "मनुस्मृती" के ऊपर रखने की वजह से तो नहीं पड़ी मुझपर!! सितारों ने जेहाद कर रखा है की लव स्टोरी 9th चैप्टर पर अटकी पड़ी है और ना दिमाग का पता है, ना ज़िन्दगी का, ना करियर का और पुराना किया धरा तो वैसे ही गोल है!!
जय शनि देव, जय हनुमान, जय माता दी... वैसे एक बात बताओ को मतलब ये गृह चाल दशा सिर्फ हिन्दू के लिए ही होती है इस्लाम में भी होता है क्या राहू केतू टाइप्स? अगर नहीं है तो "खालू कंट्रोल नी होरिया इब निकाह पढ़वा दे मेरा" बोलू और बन जाऊं बेगम-ए-खासमखास .. ओहो.. कोई हाथ रोको मेरे, सोचना बंद करवाओ, मुंह बंध करवाओ मेरा, कुर्सी से बाँध कर ये मोबाइल सबसे पहले फेको और क्लोरोफार्म सुंघा दो की ये शैतानी सोच बंद हो, थोडा मच्योर बातें करूँ नाप तोल और बिना बत्तीसी फाड़े..
.. साहित्य वालो का यदि कोई माइनोरिटी कोटा है क्या?

त्च.. गोलू.. तुमसे ना होगा बेटा.. तुमसे ना होगा.. :'(

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