Friday, 29 August 2014

के ये सफ़र अब ख़तम हो चला है..

बस कुछ देर और जी भर के देख लीजिये हमें जानिब, के ये सफ़र ख़तम सा हो चला है

चंद लम्हों में जो समेट सको सुकून को, बस सीली हवा सा तेरा हमसफ़र हो चला है..
बड़ा टूटे थे तेरे इश्को को पाने में, टूटे दिल का मर्ज़ हो चला है..

कई ख़्वाबों को रख के बुनी थी जयमाला तुम्हारी, उन्ही ख़्वाबों की बन चादर, तेरी दुल्हन का जनाज़ा निकला है..
बस कुछ और जी भर के देख लीजिये जानिब,
के हमसफ़र से फासलों का फलसफा,
और कुछ बेआबरू से वादों का कारवां
तेरे ही दर से रुख्सत हो चला है..

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