Wednesday, 30 July 2014

ना तुम मुस्कुराते ना वो बात होती

चलो ना, फिर उस बारिश में लबों को चूम लें
मैं फिर घुटनों पर बैठ कर मांग लूंगी तुम्हें, और तुम हाँ की जगह मुझे भर लेना बाहों में..
चलो ना, मुस्कुरा दो फिर से, जैस मेरे रूठ जाने पर गुदगुदी करके मुझे हंसाते थे, और जो मैं हंस के रो देती तुम्हारे सीने से लिपट कर, तुम बस मुस्कुरा देते..
चलो ना, फिर से दौड़ कर वो छूटती बस को पकड़ें और हंस दे चढ़ती सासे देख, मुझे खड़े देखे तुम्हारे इंतज़ार में तुम गाड़ी तेज़ भगा लेते..
चलो ना, फिर से जियें बस एक दूजे के लिए.. बिना परवाह किए किसी की, तुम भी वो हो मैं भी वो हूँ बस अब खुद को मना लेते..
अच्छा चलो कान पकड़ लें, मैं तुम्हारे और तुम मेरे, दिल दुखाया जो एक दूजे का उसपर मुस्कुरा कर मरहम फेरें..
..एक बार तो फिर से बाहों में भर कर देखो, सब कुछ सिफ़र होजाएगा, तुम ऐसे दूर जाओगे तो मुझको कौन खिलायेगा?
चलो ना, फिर से दर्द महसूस करें एक दूजे का, फिर जिंदगी का मकसद बन जायें, पूरा करो ना वो रूठी कहानी, या मिल कर एक ग़ज़ल हो जायें..
चलो ना, एक बार फिर से मेरा सपना देखो, मैं फिर हंस कर काँधे पर सर रख देती, तुम फिर यूँहीं गुनगुना के हंस देते.. "ना तुम मुस्कुराते ना वो बात होती" …