Monday, 3 December 2012

"बहुत प्यारे हो तुम


ना कुछ रहा पास अपने,

बस मैं और मेरी तनहाई ,

ये वो सल्तनत है,
जिसके बादशाह भी हम,

फ़कीर भी हम।
कभी आँखों के किनारे भीग जाते हैं,
तेरी याद में इस कदर,
रोये भी हम और हसे भी हम।
रोक लेते तुझे जाने से उस दिन,
मुड़  के ना देखा था तूने जब,
फिर सोचा जो एक पल तू रह गया ,
ऐसे ही कुछ रह लेंगे हम।
तेरी मुस्कराहट थी 
जो माफ़ कर दी तेरी हर खता,

इतने दिलदार नहीं थे
दोस्तों के लिए भी हम।
तेरी कमर पर वो उभरा हुआ तिल ,
आज भी याद है मुझे,
जब झूल जाती थी तू काँधे से मेरे,
कह कर " बहुत प्यारे हो तुम"


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