Tuesday, 20 November 2012

AJMAL KASAB





कसाब की मौत पर आप सभी को दिल ,जिगर ,फेफड़े ,लीवर से शुभकामनाएं।।

डू नॉट रेस्ट इन पीस कुत्ते कसाब ...

इस साल की दूसरी सबसे जायज़ मौत, पहली कौनसी? खैर जाने दीजिये वो जरूरी नहीं, मुझसे ज्यादा समझदार तोह आप सब है ही..

आज की सुन्हेरी सुबह 7:30 पर उस हरामखोर को लटका दिया गया, गुपचुप तरीके से।

हरामखोर इसलिए क्यूंकि उसने 4 साल तक हराम की ही खायी।
(और कहते हैं देश में पैसा नहीं, मेहेंगाई बढ़ गयी है, माँ !@#$%^&दो हमारे मेहनत के पैसे से तुमने 4 साल तक अपने दामाद को पाला है)


कसब किसी भागते चोर की लंगोटी से कम न था। बकरा हाथ में आया तोह नाक काटने से बची, वरना तोह 10 आदमी कहाँ गोली घुसा के निकल लिए थे । लेकिन बकरे की माँ कब तक खैर मानती।
एक एक 'हिन्दुस्तानी' जात पात भूल के एकजुट हो गया चाहे फेसबुक पर हो या कहीं और, हर किसी ने अपनी पहुँच के हिसाब से उस बकरे से "बकरीद" मानाने की इच्छा जताई।
(THANK YOU KASAB FOR UNITING INDIANS AT LEAST AT ONE POINT)

आप सभी को मुबारक हो ...आप जीत गए!!!
(कैसी जीत ये आप जाने, 1 मरोगे 1000 पैदा होंगे, रोज़ पनप रहे हैं हमारे-तुम्हारे अन्दर "कसाब")

ये तोह पता ही था की फांसी होगी, लेकिन इतनी देर लगेगी ये सोचा न था!

मतलब आप ये समझ ले की हमारी कानूनी प्रक्रिया इतनी कमजोर है की 165 लोगो की जान लेने वाले और सैकड़ो लोगो को घायल करने वाले को लटकाने में 4 साल लग गए ...

कोई नहीं, इस कमजोरी का हम 'भारतीय' तोह सालो से 'फायदा' उठाते आ रहे हैं ...

येही तोह हमारी ताकत है और इसी के चलते तोह हम छोटे से बड़ा "काण्ड" चुटकी में कर जाते हैं!
सरकार को दोष न दे, हमारे कानून से साबित किया है की वो सबके लिए सामान है।

मेरी नज़र में हमारे देश के नेता और अजमल कसब में कोई फर्क नहीं है।
(अरे ये मैंने क्या कह दिया, मुझे जेल होगी क्या?)

ऐसा लग रहा है जैसे सालो से घर घर चोरी करते आ रहे किसी चोर से गलती से अपनी पोटली में ISI की फाइल चुरा लाया और पुलिस के हाथ चढ़ गया, इसी बात पर चोर "भारत का महान बेटा " बन गया ...

ओह हो ..."महान " से वो मच्छर याद आया जिसको मीडिया ने "महानतम" बना दिया था।

मैं अपनी मुहोब्बत उस डेंगू मच्छर को कैसे भूल गयी जिसने साबित किया की साला ' साला एक मच्छर 120करोड़ की जनता को हीजड़ा बना सकता है"

♥ इ स्टिल लव यू माय डिअर मच्छर! ♥

खैर इस वक्त आप सिर्फ "26/11 को श्रद्धांजलि " का ब्युगल बजाने वाले "न्यूज़ चैनल्स" को ही चाय की चुस्कियों के साथ सुने ...

कहने को लॉजिकल तोह बहुत कुछ है लेकिन ये तोह दिललॉजिकल है न तोह सारी बकलोली चलेगी ...
आज मुर्गा खाऊँगी ...