Skip to main content

Posts

Showing posts from January 30, 2005

मुझे फ़ुर्सत कहाँ तेरे ख़याल से / Mujhe fursat kahan

मुझे फ़ुर्सत कहाँ तेरे ख़याल से , जो मैं तुझे सब्र-ओ-क़रार दूँ? मेरी ज़िंदगी वीरान है, तुझे कहाँ से शाम उधार दूँ? मेरा आशियाँ सब उजड़ गया तुमसे जुदाई के ग़म में, मेरा रंग रूप सब उड़ गया तुझे कौनसा सृंगार दूँ? तुझे क्या सुनाऊँ मैं तेरे हाल से मैं बेहाल हूँ, मेरा दामन है तार तुझे कैसे सँवार दूँ? तेरा वास्ता ना रह गया जब मेरे ख़याल से, ख़ुदहूँ मैं बेक़रार कहाँ से तुझे क़रार दूँ? मेरी शाम में हैं तेरी आरज़ू मेरी सुबह तेरा ख़याल है मुझे ख़ुद का कोई होश नहीं तुझे किस तरह निखार दूँ? मेरे घर की दीवार-ओ-दर सजी है तेरी महफ़िल से, हर रात गुज़री है वहीं अब तेरे बिना कैसे गुज़ार दूँ? मेरे रोज़ रोज़ का वास्ता है तेरे उस चाँद से चेहरे से, करता रहा इन्तज़ार वो दिल से कैसे तुझे उतार दूँ? तू ही बता ए बदलने वाले मुझे, फ़ुर्सत कहाँ तेरे ख़याल से... जो मैं तुझे सब्र-ओ-क़रार दूँ? ____________________________________________________________ BOL TUJHE MAIN KYA DU...? Mujhe fursat kahan tere khayal se, jo main tujhe sabro karar du.. Meri jindgi veeran hai, tujhe kahan se s