Skip to main content

Posts

"The Fight"

I had a fight with 'Kabeer' last night. For no obvious reasons. Maybe women are like this. Or maybe I am like this. I wanted him to understand the unspoken pain, which he cannot, no one can actually. We did not talk last night and slept facing the opposite universes. I missed his arms and the peace, it was a restless night. Morning, He left for the gym without intimating me, actually without the morning kiss. I woke up and searched for him in the bed. I forgot I had a fight last night. I could not find him. Rubbed my half opened-red eyes and raised eyebrows at the clock. I am Late... Recollected last night and frowned.. ' huh ..' Love is what - when we take care of each other in anger as well. So, I prepared his favourite chicken sandwiches, not in my style but the way he wanted - slightly crisped chopped onions and tomatoes. He came back and had no expression on his face. Neither Angry nor Calm. I figured out.. 'He is angry' because he straight
Recent posts

वहीं चले आए..

वहीं से उठे और वहीं चले आए बड़े ग़ुरूर से हम वो बात कह आए ढूंढ लो कहीं , है जमीं, है आसमाँ यहीं तुमसे तो ज़्यादा करीब हैं तुम्हारे साए वहीं से उठे और वहीं चले आए..  वो टूटे से थे कुछ, कुछ ज़्यादा ही, सहमा सा इश्क कर बैठे, आधा, कुछ आधा ही, हम थाम लें भर कर चहरे को इन हाथो में उलझा कर इस सहमे हुए दिल को बातों में  की फिर से पहली सी मुहोब्बत एक बार हो जाए वहीं से उठे और वहीं चले आए.. बड़ा मुश्किल हो चला , है यह एक तरफ़ा इश्क़ सा ज़ाया हम ही आएंगे लौट कर, ख़ुद ही को समझाया वो मेरा क्या होगा, जो खुद का न हो सका हम तो समझ गए पर इस दिल को कौन समझाए रूठ कर उनसे, बड़े ग़ुरूर में कह आए तुमसे करीब हैं सिर्फ, तुम्हारे साए और खुद ही हार गए अपनी जिद से फिर वहीं से उठे और वहीं चले आए... 

That Old School Kiss..

I was pretty nervous to take a step forward towards you, I can't explain the doubts I had before agreeing to accept you in my life.  I never thought I'd be ready to surrender myself in someone's arms again and I never thought I'd have the guts to admit that I'm weak enough to fall in love with you.. That kiss, I had with you shook my soul and brought out the stupid insecurities of a teenager "what if I become pregnant after this kiss" That kiss.. blew a heat stoke inside my body in such a nerve chilling weather, that kiss what a hope that I still have love left in me and I could gather my courage to walk holding someone's hands..  Maybe you shouldn't have kissed me, because some people are a really old school who could bind souls over kisses..  #kisses 

टपरी पर उनकी सिगरेट..

बड़े अरसे बाद वो मिल गए उसी चौराहे पर टपरी के कोने में सिगरेट जलाए होते थे निकलेंगे अभी हम बस इसी रास्ते से उन चाय के न जाने कितने बकाए होते थे हर रोज़ फेंक देते थे वो अध बुझी सी बातें कोई देख लेगा तो क्या हो और हर रोज़ फिर जला लेते थे ख़ुद-बुनी यादें के एक रोज़ कह ही दे तो क्या हो बड़े अरसे बाद वह मिल गए उसी कुर्ते में होली के दाग छुड़ाए होते थे लटकती थी एक जेब उनकी माचिस से ना जाने कैसे ऐब लगाए होते थे बड़े अरसे बाद वो मिल गए उसी चौराहे पर टपरी के कोने में, सिगरेट जलाए होते थे.. Never liked him smoking, never liked that he couldn't come and say "I like you".. 

क्यों आए थे?

ये वक़्त-बेवक़्त की बचकानी बातें हैं, इन्हें जाने दो.. तुम समझ नही पाओगी,तुम्हे समझाने दो..  ऐसी तरक़ीब से उन्होंने उलझा के रख दी बड़ी मुश्किल से जो मसले सुझाए थे रहना - ना रहना बाद कि बाते हैं गर नामालूम था पता, तो क्यों आये थे?  हाँ ठीक! तुम सही, हम गलत,  सब गलत, ये इश्क गलत.. हमने तो न दी थी वजह, ना रास्ते बताए थे, गर ना मालूम था पता, तो क्यों आए थे?   मान लेते हैं तुम यूँ ही निकल आये, चलो जाने दो..  हम फिर संभाल जाएंगे, थोड़ा टूट जाने दो..  ये इश्क के फ़लसफ़े हैं, यूँ ही नही बन जाते..  कभी तो आओगे पलट के, तो पूछ लेंगे..  क्यों आए थे? 

ए वक्त ,तू गवाह है

ऐ वक्त, तू गवाह है.. कभी वो सजी हुई वैश्या सा बिछा है मेरे आगे.. और ये भी तूने देखा है, कैसै सुबह के सूरज सा जला है वो देखा है यह भी  बनारस के पाखंडी सा घूनी रमा और जो फिर हर रात वो गले में इतर, होंठ लाल कर एक नई कली मसलने चला.. देखा है तूने मुझे भी उसके सिर को रखा है गोद में एक माँ की तरह और परोसा है खुद को मैने भरे वॅक्षो से मेघ की तरह ए वक्त ,तू गवाह है वो बिछा है मेरे आगे, वेश्या की तरह.. मुड़ा ना वो, गुजरा जब मेरे  शामियाने से आगे, नज़रें बचा फिर भी गिरी उसकी निगाहें कनखियों से हमपर  के देख ना लूँ मैं कहीं उसके कुर्ते पर पड़े नयी कली के निशान.. मेरे खरीदार ने निभाये हैं किरदार कई, कभी मेरी तरह, कभी अपनी तरह... 5/1/2014

जाड़ों जैसी, तेरी याद..

सर्दियों कि धुंधली सुबह सी तेरी याद  नम करती आँखें कुछ वैसे ही  कंपकंपाते होंठ और थरथराता जिस्म  वैसे ही जैसे, जाड़े कि सुबहों में  तुम भीगे हाथ लगते थे  और हँसते थे मेरे रूस जाने पर  और सर्द रातों सी ये तेरी याद  सुनसान रातों में किटकिटाते दांतों सी, खुद ही को देती सुनाई  गर्म साँसों को फूँकती और हथेली को करती गर्म  घिसती और टांगों के बीच छुपाती  ठंडी सी नाक और  खुश्क लब  और उनमे बसी, जाड़ों जैसी, तेरी  याद..